श्री बुध कवचम् — ब्रह्मवैवर्त पुराणोक्त बुद्धि व वाणी रक्षक
विद्या, तीक्ष्ण बुद्धि, वाक्-पटुता और व्यापारिक सफलता हेतु भगवान् बुध देव का सिद्ध रक्षा कवच।
डॉ. विनोद पण्डेय
विद्या, तीक्ष्ण बुद्धि, वाक्-पटुता और व्यापारिक सफलता हेतु भगवान् बुध देव का सिद्ध रक्षा कवच।

इस लेख में दिए गए उपाय, टोटके, मंत्र व स्तोत्र सार्वभौमिक वैदिक सिद्धांतों पर आधारित हैं। इनका सटीक परिणाम आपकी जन्म कुंडली, ग्रह स्थिति, महादशा व गोचर पर निर्भर करता है। अतः किसी भी उपाय या साधना को व्यक्तिगत रूप से करने से पहले ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।
श्री बुध कवचम्
स्रोत एवं पौराणिक संदर्भ: यह पावन कवच ब्रह्मवैवर्त पुराण से उद्धृत है। इसके ऋषि कश्यप हैं और देवता बुद्धिप्रदाता बुध ग्रह हैं।
॥ विनियोगः ॥
ॐ अस्य श्रीबुधकवचस्तोत्रमन्त्रस्य कश्यप ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, बुधो देवता, बुधप्रीत्यर्थे जपे विनियोगः ॥
॥ मूल संस्कृत कवचम् ॥
बुधस्तु पातु मे मूर्धानं ललाटं रोहिणीसुतः ।
नेत्रे सौम्यवपुः पातु कर्णौ पातु निशाकरः ॥ १ ॥
घ्राणं गन्धप्रियः पातु मुखं मे पातु सर्वदा ।
जिह्वां विद्याप्रदः पातु कण्ठं मे पातु चन्द्रजः ॥ २ ॥
स्कन्धौ मे पातु मेधावी भुजौ पातु ग्रहाधिपः ।
हस्तौ मे पातु सौम्यश्च हृदयं पातु सद्गुरुः ॥ ३ ॥
मध्यं पातु महाप्राज्ञो नाभिं पातु बुधः सदा ।
कटिं पातु सदा धीमान् ऊरू मे पातु पण्डितः ॥ ४ ॥
जानुनी मे सदा पातु जङ्घे पातु सुशोभनः ।
पादौ मे पातु सौम्योऽयं पातु सर्वं कलेवरम् ॥ ५ ॥
॥ इति श्रीब्रह्मवैवर्तपुराणे बुधकवचं सम्पूर्णम् ॥
॥ जप / पाठ समर्पण मन्त्रः ॥
गुह्यातिगुह्यगोप्ता त्वं गृहाणास्मत्कृतं जपम् ।
सिद्धिर्भवतु मे देव त्वत्प्रसादात् सोमज ॥
॥ ॐ तत्सत् श्रीबुधदेवचरणार्पणमस्तु ॥
॥ पाठ विधि एवं ज्योतिषीय फल ॥
1. बुधवार का दिन: बुधवार के दिन प्रातः स्नान के बाद हरे रंग के आसन पर बैठकर उत्तर दिशा की ओर मुख करें।
2. भोग व अर्घ्य: तुलसी पत्र, मूंग की दाल और दूर्वा अर्पित कर ३ पाठ करें।
3. ज्योतिषीय प्रभाव: स्मरण शक्ति, एकाग्रता, वाणी दोष, त्वचा रोग तथा व्यापार व शेयर बाज़ार में सफलता हेतु यह कवच अत्यंत श्रेष्ठ है।
इस पाठ एवं उपाय से प्राप्त होने वाले व्यावहारिक लाभ
ऋषि-मुनियों द्वारा प्रतिपादित इस अनुष्ठान का नियमित अभ्यास करने से जातक को निम्नलिखित प्रत्यक्ष सकारात्मक परिणामों की अनुभूति होती है:
मानसिक शांति व एकाग्रता
दैनिक चिंता, अज्ञात भय, अनिद्रा व नकारात्मक विचारों का शमन होकर आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
संकट व विघ्न निवारण
लंबे समय से अटके हुए कार्य, कानूनी अड़चनों व व्यावसायिक रुकावटों में दैवीय मार्ग प्रशस्त होता है।
आर्थिक स्थिरता व ऋण मुक्ति
मां महालक्ष्मी व कुबेर देव की कृपा से अनावश्यक धन अपव्यय रुकता है और आय के नए स्रोत बनते हैं।
ग्रह दोष शमन व भाग्योदय
कुंडली के क्रूर ग्रहों (शनि, राहु, मंगल) के अशुभ गोचर का प्रभाव शांत होकर शुभ फलों में वृद्धि होती है।
पाठ एवं पूजन की सरल प्रामाणिक विधि
किसी भी स्तोत्र या उपाय की पूर्ण सिद्धि के लिए सही विधि व नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है:
शुद्धि व पवित्रता (Purity & Preparation)
प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ श्वेत अथवा पीले वस्त्र धारण करें। चित्त को शांत और एकाग्र रखें।
दिशा व आसन (Direction & Seating)
पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। बैठने के लिए कुशा अथवा ऊनी आसन का प्रयोग करें।
दीप प्रज्वलन व आचमन (Lamp & Holy Water)
गाय के शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें और तांबे के पात्र में स्वच्छ जल रखें।
संकल्प व पाठ (Sankalpa & Mindful Recitation)
हाथ में अक्षत व जल लेकर अपनी मनोकामना का स्मरण करें और स्पष्ट स्वर में लयबद्ध पाठ करें।
समर्पण व क्षमा याचना (Surrender & Gratitude)
पाठ के समापन पर भगवान को प्रणाम करें और अनजाने में हुई किसी त्रुटि के लिए क्षमा मांगें।
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आपकी लग्न राशि व वर्तमान महादशा के अनुसार यह पाठ कितने दिनों तक और किस माला से करना चाहिए, ज्योतिषी से सीधे 1-on-1 चैट पर पूछें।
इस पाठ एवं उपाय से संबंधित सामान्य जिज्ञासाएं
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