श्री केतु कवचम् — ब्रह्माण्ड पुराणोक्त कैवल्य रक्षा कवच
रहस्यमयी पीड़ा, गुप्त भय, त्वचा रोग तथा केतु जनित अनिष्ट को दूर कर आध्यात्मिक सिद्धि प्रदाता केतु कवच।
डॉ. विनोद पण्डेय
रहस्यमयी पीड़ा, गुप्त भय, त्वचा रोग तथा केतु जनित अनिष्ट को दूर कर आध्यात्मिक सिद्धि प्रदाता केतु कवच।

इस लेख में दिए गए उपाय, टोटके, मंत्र व स्तोत्र सार्वभौमिक वैदिक सिद्धांतों पर आधारित हैं। इनका सटीक परिणाम आपकी जन्म कुंडली, ग्रह स्थिति, महादशा व गोचर पर निर्भर करता है। अतः किसी भी उपाय या साधना को व्यक्तिगत रूप से करने से पहले ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।
श्री केतु कवचम्
स्रोत एवं पौराणिक संदर्भ: यह दिव्य कवच ब्रह्माण्ड पुराण से उद्धृत है। इसके ऋषि कश्यप हैं और देवता मोक्षप्रदाता केतु ग्रह हैं।
॥ विनियोगः ॥
ॐ अस्य श्रीकेतुकवचस्तोत्रमन्त्रस्य कश्यप ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, केतुर्देवता, केतुप्रीत्यर्थे जपे विनियोगः ॥
॥ मूल संस्कृत कवचम् ॥
केतुः पातु शिरो मेऽव्याद् भालं पातु महाग्रहः ।
नेत्रे मे पातु चित्रेशः श्रवणे धूम्रकेतनः ॥ १ ॥
घ्राणं मे पातु शूलाग्रो मुखं मे पातु विकटः ।
जिह्वां मे पातु मोक्षज्ञः कण्ठं मे पातु पापहृत् ॥ २ ॥
स्कन्धौ मे पातु सर्वात्मा भुजौ मे पातु शक्तिभृत् ।
हस्तौ मे पातु गदाहस्तो हृदयं पातु वै कलः ॥ ३ ॥
मध्यं मे पातु मन्त्रज्ञो नाभिं पातु महोदकः ।
कटिं मे पातु ताराधिप ऊरू मे पातु शूलभृत् ॥ ४ ॥
जानुनी मे महातेजो जङ्घे मे पातु धूम्रभृत् ।
पादौ मे पातु मोक्षेशः पातु सर्वं कलेवरम् ॥ ५ ॥
॥ इति श्रीब्रह्माण्डपुराणे केतुकवचं सम्पूर्णम् ॥
॥ जप / पाठ समर्पण मन्त्रः ॥
गुह्यातिगुह्यगोप्ता त्वं गृहाणास्मत्कृतं जपम् ।
सिद्धिर्भवतु मे देव त्वत्प्रसादाद् ग्रहोत्तम ॥
॥ ॐ तत्सत् श्रीकेतुदेवचरणार्पणमस्तु ॥
॥ पाठ विधि एवं ज्योतिषीय फल ॥
1. मंगलवार या गुरुवार: सायंकाल केतु के इस कवच का ३ पाठ करें।
2. गणेश उपासना: केतु की पीड़ा शांति हेतु भगवान् गणेश जी को दुर्वा चढ़ाकर यह पाठ करने से अद्भुत फल मिलता है।
3. ज्योतिषीय प्रभाव: गुप्त शत्रु, रहस्यमयी बीमारियां, अनिद्रा, डिप्रेशन तथा केतु की महादशा से पूर्ण रक्षा करता है।
इस पाठ एवं उपाय से प्राप्त होने वाले व्यावहारिक लाभ
ऋषि-मुनियों द्वारा प्रतिपादित इस अनुष्ठान का नियमित अभ्यास करने से जातक को निम्नलिखित प्रत्यक्ष सकारात्मक परिणामों की अनुभूति होती है:
मानसिक शांति व एकाग्रता
दैनिक चिंता, अज्ञात भय, अनिद्रा व नकारात्मक विचारों का शमन होकर आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
संकट व विघ्न निवारण
लंबे समय से अटके हुए कार्य, कानूनी अड़चनों व व्यावसायिक रुकावटों में दैवीय मार्ग प्रशस्त होता है।
आर्थिक स्थिरता व ऋण मुक्ति
मां महालक्ष्मी व कुबेर देव की कृपा से अनावश्यक धन अपव्यय रुकता है और आय के नए स्रोत बनते हैं।
ग्रह दोष शमन व भाग्योदय
कुंडली के क्रूर ग्रहों (शनि, राहु, मंगल) के अशुभ गोचर का प्रभाव शांत होकर शुभ फलों में वृद्धि होती है।
पाठ एवं पूजन की सरल प्रामाणिक विधि
किसी भी स्तोत्र या उपाय की पूर्ण सिद्धि के लिए सही विधि व नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है:
शुद्धि व पवित्रता (Purity & Preparation)
प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ श्वेत अथवा पीले वस्त्र धारण करें। चित्त को शांत और एकाग्र रखें।
दिशा व आसन (Direction & Seating)
पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। बैठने के लिए कुशा अथवा ऊनी आसन का प्रयोग करें।
दीप प्रज्वलन व आचमन (Lamp & Holy Water)
गाय के शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें और तांबे के पात्र में स्वच्छ जल रखें।
संकल्प व पाठ (Sankalpa & Mindful Recitation)
हाथ में अक्षत व जल लेकर अपनी मनोकामना का स्मरण करें और स्पष्ट स्वर में लयबद्ध पाठ करें।
समर्पण व क्षमा याचना (Surrender & Gratitude)
पाठ के समापन पर भगवान को प्रणाम करें और अनजाने में हुई किसी त्रुटि के लिए क्षमा मांगें।
क्या आप अपनी कुंडली अनुसार संकल्प व समय जानना चाहते हैं?
आपकी लग्न राशि व वर्तमान महादशा के अनुसार यह पाठ कितने दिनों तक और किस माला से करना चाहिए, ज्योतिषी से सीधे 1-on-1 चैट पर पूछें।
इस पाठ एवं उपाय से संबंधित सामान्य जिज्ञासाएं
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