श्री महामृत्युंजय स्तोत्रम् — मार्कण्डेय ऋषि कृत अकाल मृत्यु व रोग नाशक दिव्य पाठ
बालक मार्कण्डेय द्वारा यमराज के भय पर विजय प्राप्त करने वाला परम कल्याणकारी महामृत्युंजय स्तोत्र। असाध्य रोग, अकाल मृत्यु भय, दुर्घटना योग और राहु-शनि की महादशा में सुरक्षा का अचूक उपाय।
डॉ. विनोद पण्डेय
बालक मार्कण्डेय द्वारा यमराज के भय पर विजय प्राप्त करने वाला परम कल्याणकारी महामृत्युंजय स्तोत्र। असाध्य रोग, अकाल मृत्यु भय, दुर्घटना योग और राहु-शनि की महादशा में सुरक्षा का अचूक उपाय।

इस लेख में दिए गए उपाय, टोटके, मंत्र व स्तोत्र सार्वभौमिक वैदिक सिद्धांतों पर आधारित हैं। इनका सटीक परिणाम आपकी जन्म कुंडली, ग्रह स्थिति, महादशा व गोचर पर निर्भर करता है। अतः किसी भी उपाय या साधना को व्यक्तिगत रूप से करने से पहले ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।
श्री महामृत्युंजय स्तोत्रम् — अकाल मृत्यु नाशक पावन पाठ
ऋग्वेद एवं यजुर्वेद में प्रतिपादित महामृत्युंजय मंत्र तथा स्कन्द पुराणोक्त महामृत्युंजय स्तोत्रम् भगवान आशुतोष शिव का वह परम संजीवनी कवच है, जिसके प्रभाव से अल्पायु बालक मार्कण्डेय ने यमराज के पाश को निष्फल कर अमरता का वरदान प्राप्त किया था।
यह स्तोत्र केवल मृत्यु भय को ही नहीं हरता, अपितु जीवन के समस्त असाध्य रोगों, गहन अवसाद, ग्रहों के मारक दोषों और गंभीर संकटों का समूल नाश करने में अद्वितीय है।
महामृत्युंजय स्तोत्रम् — संपूर्ण मूल संस्कृत पाठ
॥ ध्यानम् ॥
ॐ ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसं
रत्नाकल्पोज्ज्वलाङ्गं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्।
पद्मासीनं समन्तात् स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं
विश्वाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रम्॥
॥ मूल स्तोत्रम् ॥
ॐ चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर पाहि माम्।
चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर रक्ष माम्॥१॥
(हे चन्द्रशेखर! हे महादेव! मेरी रक्षा कीजिए, मुझे अपनी शरण में लीजिए।)
रत्नसानुशरासनं रजताद्रिशृङ्गनिकेतनं
शिञ्जिनीकृतपन्नगेश्वरमच्युतानलसायकम्।
क्षिप्रदग्धपुरत्रयं त्रिदशालयैरभिवन्दितं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः॥२॥
(जिन्होंने मेरु पर्वत को धनुष और वासुकि नाग को प्रत्यंचा बनाया, विष्णु को बाण रूप बनाकर क्षण भर में त्रिपुरासुर को भस्म कर दिया, ऐसे देवाधिदेव चन्द्रशेखर की शरण में होने पर यमराज मेरा क्या बिगाड़ सकता है?)
पञ्चपादपपुष्पगन्धपदाम्बुजद्वयशोभितं
भाललोचनजातपावकदग्धमन्मथविग्रहम्।
भस्मदिग्धकलेवरं भवनाशनं भवमव्ययं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः॥३॥
मत्तवारणमुख्यचर्मकृतोत्तरीयरनोहरं
पङ्कजासनपद्मलोचनपूजिताङ्घ्रिसरोरुहम्।
देवसिन्धुतरङ्गसीकरसिक्तशुभ्रजटाधरं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः॥४॥
यक्षराजसखं भगक्षपहं भुजङ्गविभूषणं
शैलराजसुतापरिष्कृतचारुवामकलेवरम्।
क्ष्वेलनीलगलं परश्वधधारिणं मृगधारिणं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः॥५॥
कुण्डलीकृतकुण्डलेश्वरकुण्डलं वृषवाहनं
नारदादिमुनीश्वरैः स्तुतवैभवं भुवनेश्वराम्।
अन्धकान्धकमन्तकप्रियमाश्रितार्तिनिवारणं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः॥६॥
भेषजं भवरोगिणामखिलापदामपहारिणं
दक्षयज्ञविनाशनं त्रिगुणात्मकं त्रिविलोचनम्।
भुक्तिमुक्तिफलप्रदं सकलाघसङ्घनिवर्हणं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः॥७॥
भक्तवत्सलमर्चतां निधिमक्षयं हरिदम्बरं
सर्वभूतपतिं परात्परमप्रमेयमनुत्तमम्।
सोमसूर्यहूताशनेक्षणमाश्रितामरपादपं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः॥८॥
॥ संजीवनी महामृत्युंजय मंत्र ॥
> ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
> उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
सरल भावार्थ: हम त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की आराधना करते हैं, जो समस्त संसार को सुगंधित करने वाले और प्रत्येक जीव का पोषण करने वाले हैं। जिस प्रकार पका हुआ खरबूजा बेल के बंधन से सहज ही मुक्त हो जाता है, उसी प्रकार हम मृत्यु के भय से मुक्त होकर मोक्ष व अमृतत्व को प्राप्त हों।
महामृत्युंजय साधना के प्रमुख लाभ
1. अकाल मृत्यु व दुर्घटना योग निवारण: कुंडली में मारकेश, शनि-राहु की युति अथवा अल्पायु योग होने पर यह पाठ रक्षा कवच का कार्य करता है।
2. गंभीर व असाध्य रोगों में स्वास्थ्य लाभ: आईसीयू या असाध्य व्याधियों में जल को अभिमंत्रित कर रोगी को पिलाने से चमत्कारी सुधार होता है।
3. मानसिक भय व अवसाद की समाप्ति: मृत्यु भय, फोबिया, पैनिक अटैक और घबराहट को जड़ से मिटाता है।
4. शनि की साढ़े साती व ढैय्या में शांति: भगवान शिव का आश्रय शनिदेव के क्रूर दंड से तुरंत मुक्ति दिलाता है।
शुद्ध अनुष्ठान विधि
सामग्री*: तांबे या पारद का शिवलिंग, गंगाजल, कच्चा दूध, बेलपत्र, भांग, भस्म और रुद्राक्ष माला।
समय*: प्रातःकाल पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
पाठ संख्या*: प्रतिदिन ११ अथवा २१ बार पाठ करें। रोगी के निमित्त परिवार का कोई सदस्य भी संकल्प लेकर पाठ कर सकता है।
इस पाठ एवं उपाय से प्राप्त होने वाले व्यावहारिक लाभ
ऋषि-मुनियों द्वारा प्रतिपादित इस अनुष्ठान का नियमित अभ्यास करने से जातक को निम्नलिखित प्रत्यक्ष सकारात्मक परिणामों की अनुभूति होती है:
मानसिक शांति व एकाग्रता
दैनिक चिंता, अज्ञात भय, अनिद्रा व नकारात्मक विचारों का शमन होकर आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
संकट व विघ्न निवारण
लंबे समय से अटके हुए कार्य, कानूनी अड़चनों व व्यावसायिक रुकावटों में दैवीय मार्ग प्रशस्त होता है।
आर्थिक स्थिरता व ऋण मुक्ति
मां महालक्ष्मी व कुबेर देव की कृपा से अनावश्यक धन अपव्यय रुकता है और आय के नए स्रोत बनते हैं।
ग्रह दोष शमन व भाग्योदय
कुंडली के क्रूर ग्रहों (शनि, राहु, मंगल) के अशुभ गोचर का प्रभाव शांत होकर शुभ फलों में वृद्धि होती है।
पाठ एवं पूजन की सरल प्रामाणिक विधि
किसी भी स्तोत्र या उपाय की पूर्ण सिद्धि के लिए सही विधि व नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है:
शुद्धि व पवित्रता (Purity & Preparation)
प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ श्वेत अथवा पीले वस्त्र धारण करें। चित्त को शांत और एकाग्र रखें।
दिशा व आसन (Direction & Seating)
पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। बैठने के लिए कुशा अथवा ऊनी आसन का प्रयोग करें।
दीप प्रज्वलन व आचमन (Lamp & Holy Water)
गाय के शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें और तांबे के पात्र में स्वच्छ जल रखें।
संकल्प व पाठ (Sankalpa & Mindful Recitation)
हाथ में अक्षत व जल लेकर अपनी मनोकामना का स्मरण करें और स्पष्ट स्वर में लयबद्ध पाठ करें।
समर्पण व क्षमा याचना (Surrender & Gratitude)
पाठ के समापन पर भगवान को प्रणाम करें और अनजाने में हुई किसी त्रुटि के लिए क्षमा मांगें।
क्या आप अपनी कुंडली अनुसार संकल्प व समय जानना चाहते हैं?
आपकी लग्न राशि व वर्तमान महादशा के अनुसार यह पाठ कितने दिनों तक और किस माला से करना चाहिए, ज्योतिषी से सीधे 1-on-1 चैट पर पूछें।
इस पाठ एवं उपाय से संबंधित सामान्य जिज्ञासाएं
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