श्री नारायण स्तोत्रम् — परमब्रह्म स्तुति एवं नारायणोपनिषद् भाव
भगवान् श्रीमन नारायण के परम मंगलमय स्वरूप का गुणगान करने वाला परम सिद्ध व मोक्षप्रद स्तोत्र।
डॉ. विनोद पण्डेय
भगवान् श्रीमन नारायण के परम मंगलमय स्वरूप का गुणगान करने वाला परम सिद्ध व मोक्षप्रद स्तोत्र।

इस लेख में दिए गए उपाय, टोटके, मंत्र व स्तोत्र सार्वभौमिक वैदिक सिद्धांतों पर आधारित हैं। इनका सटीक परिणाम आपकी जन्म कुंडली, ग्रह स्थिति, महादशा व गोचर पर निर्भर करता है। अतः किसी भी उपाय या साधना को व्यक्तिगत रूप से करने से पहले ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।
श्री नारायण स्तोत्रम्
स्रोत एवं संदर्भ: नारायणोपनिषद् एवं जगद्गुरु आदि शंकराचार्य विरचित यह स्तोत्र साक्षात नारायण रूप का साक्षात्कार कराने वाला पावन पाठ है।
॥ विनियोगः ॥
ॐ अस्य श्रीनारायणस्तोत्रमहामन्त्रस्य भगवान् नारायण ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीलक्ष्मीनारायणो देवता, श्रीलक्ष्मीनारायणप्रीत्यर्थे जपे विनियोगः ॥
॥ मूल संस्कृत स्तोत्रम् ॥
नारायण नारायण जय गोविन्द हरे ।
नारायण नारायण जय गोपाल हरे ॥ १ ॥
कमलाकान्त यदुविमलकुलोद्भव जय गोविन्द हरे ।
मधुमुरनरकविनाशन शोभन जय गोपाल हरे ॥ २ ॥
गरुडध्वज जलदसुन्दर माधव जय गोविन्द हरे ।
कमलाविमलनयन सुरवन्दित जय गोपाल हरे ॥ ३ ॥
जलनिधिशयन सुलोचन मोहन जय गोविन्द हरे ।
भक्तजनाय वरप्रद पावन जय गोपाल हरे ॥ ४ ॥
पीताम्बरधर सुन्दर विग्रह जय गोविन्द हरे ।
शङ्खगदाधर पद्मसुशोभित जय गोपाल हरे ॥ ५ ॥
वृन्दावनालय वेणुविवादक जय गोविन्द हरे ।
गोपीमानसराजहंस जय जय गोपाल हरे ॥ ६ ॥
॥ इति श्रीमन्नारायणस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
॥ जप / पाठ समर्पण मन्त्रः ॥
कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतेः स्वभावात् ।
करोमि यद्यत् सकलं परस्मै नारायणायेति समर्पयामि ॥
॥ ॐ तत्सत् श्रीलक्ष्मीनारायणार्पणमस्तु ॥
इस पाठ एवं उपाय से प्राप्त होने वाले व्यावहारिक लाभ
ऋषि-मुनियों द्वारा प्रतिपादित इस अनुष्ठान का नियमित अभ्यास करने से जातक को निम्नलिखित प्रत्यक्ष सकारात्मक परिणामों की अनुभूति होती है:
मानसिक शांति व एकाग्रता
दैनिक चिंता, अज्ञात भय, अनिद्रा व नकारात्मक विचारों का शमन होकर आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
संकट व विघ्न निवारण
लंबे समय से अटके हुए कार्य, कानूनी अड़चनों व व्यावसायिक रुकावटों में दैवीय मार्ग प्रशस्त होता है।
आर्थिक स्थिरता व ऋण मुक्ति
मां महालक्ष्मी व कुबेर देव की कृपा से अनावश्यक धन अपव्यय रुकता है और आय के नए स्रोत बनते हैं।
ग्रह दोष शमन व भाग्योदय
कुंडली के क्रूर ग्रहों (शनि, राहु, मंगल) के अशुभ गोचर का प्रभाव शांत होकर शुभ फलों में वृद्धि होती है।
पाठ एवं पूजन की सरल प्रामाणिक विधि
किसी भी स्तोत्र या उपाय की पूर्ण सिद्धि के लिए सही विधि व नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है:
शुद्धि व पवित्रता (Purity & Preparation)
प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ श्वेत अथवा पीले वस्त्र धारण करें। चित्त को शांत और एकाग्र रखें।
दिशा व आसन (Direction & Seating)
पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। बैठने के लिए कुशा अथवा ऊनी आसन का प्रयोग करें।
दीप प्रज्वलन व आचमन (Lamp & Holy Water)
गाय के शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें और तांबे के पात्र में स्वच्छ जल रखें।
संकल्प व पाठ (Sankalpa & Mindful Recitation)
हाथ में अक्षत व जल लेकर अपनी मनोकामना का स्मरण करें और स्पष्ट स्वर में लयबद्ध पाठ करें।
समर्पण व क्षमा याचना (Surrender & Gratitude)
पाठ के समापन पर भगवान को प्रणाम करें और अनजाने में हुई किसी त्रुटि के लिए क्षमा मांगें।
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आपकी लग्न राशि व वर्तमान महादशा के अनुसार यह पाठ कितने दिनों तक और किस माला से करना चाहिए, ज्योतिषी से सीधे 1-on-1 चैट पर पूछें।
इस पाठ एवं उपाय से संबंधित सामान्य जिज्ञासाएं
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