घर से नजर दोष व नकारात्मक ऊर्जा हटाने की कपूर-गुग्गल धूनी
घर में भारीपन, चिड़चिड़ापन या बिना कारण लड़ाई-झगड़ा हो तो यह नजर रक्षा और शुद्धिकरण का सर्वश्रेष्ठ उपाय है।
डॉ. विनोद पण्डेय
घर में भारीपन, चिड़चिड़ापन या बिना कारण लड़ाई-झगड़ा हो तो यह नजर रक्षा और शुद्धिकरण का सर्वश्रेष्ठ उपाय है।

इस लेख में दिए गए उपाय, टोटके, मंत्र व स्तोत्र सार्वभौमिक वैदिक सिद्धांतों पर आधारित हैं। इनका सटीक परिणाम आपकी जन्म कुंडली, ग्रह स्थिति, महादशा व गोचर पर निर्भर करता है। अतः किसी भी उपाय या साधना को व्यक्तिगत रूप से करने से पहले ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।
घर की नकारात्मक ऊर्जा व नजर दोष निवारण
१. ज्योतिषीय कारण
घर के वातावरण में जब राहु-केतु का दुष्प्रभाव बढ़ता है या किसी ईर्ष्यालु व्यक्ति की नकारात्मक दृष्टि पड़ती है, तो घर का वास्तु मंडल भारी हो जाता है और पौधों का सूखना, दूध का फटना जैसी घटनाएं घटने लगती हैं।
२. अचूक घरेलू उपाय
1. कपूर, लौंग और गुग्गल की धूनी: प्रतिदिन संध्या आरती के पश्चात पीतल के पात्र में २ कपूर की टिकिया, २ फूल वाली लौंग और थोड़ी शुद्ध गुग्गल सुलगाकर पूरे घर में धूनी घुमाएं।
2. नमक के पानी का पोंछा: मंगलवार और शनिवार को पोंछे के पानी में एक मुट्ठी साबुत खड़ा नमक डालकर पूरे घर में पोंछा लगवाएं।
3. मुख्य द्वार पर पीली सरसों: शनिवार की रात मुख्य द्वार की चौखट पर थोड़ी सी पीली सरसों छिड़क दें और अगली सुबह झाड़ू से बाहर कर दें।
4. पंचमुखी हनुमान चित्र: घर के मुख्य द्वार के बाहर ऊपर की ओर पंचमुखी हनुमान जी का चित्र लगाएं।
३. सावधानियां
- धूनी का धुआं शौचालय या बाथरूम के भीतर न ले जाएं।
- शाम के समय कभी भी घर की दहलीज पर खड़े होकर बात न करें।
इस पाठ एवं उपाय से प्राप्त होने वाले व्यावहारिक लाभ
ऋषि-मुनियों द्वारा प्रतिपादित इस अनुष्ठान का नियमित अभ्यास करने से जातक को निम्नलिखित प्रत्यक्ष सकारात्मक परिणामों की अनुभूति होती है:
मानसिक शांति व एकाग्रता
दैनिक चिंता, अज्ञात भय, अनिद्रा व नकारात्मक विचारों का शमन होकर आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
संकट व विघ्न निवारण
लंबे समय से अटके हुए कार्य, कानूनी अड़चनों व व्यावसायिक रुकावटों में दैवीय मार्ग प्रशस्त होता है।
आर्थिक स्थिरता व ऋण मुक्ति
मां महालक्ष्मी व कुबेर देव की कृपा से अनावश्यक धन अपव्यय रुकता है और आय के नए स्रोत बनते हैं।
ग्रह दोष शमन व भाग्योदय
कुंडली के क्रूर ग्रहों (शनि, राहु, मंगल) के अशुभ गोचर का प्रभाव शांत होकर शुभ फलों में वृद्धि होती है।
पाठ एवं पूजन की सरल प्रामाणिक विधि
किसी भी स्तोत्र या उपाय की पूर्ण सिद्धि के लिए सही विधि व नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है:
शुद्धि व पवित्रता (Purity & Preparation)
प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ श्वेत अथवा पीले वस्त्र धारण करें। चित्त को शांत और एकाग्र रखें।
दिशा व आसन (Direction & Seating)
पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। बैठने के लिए कुशा अथवा ऊनी आसन का प्रयोग करें।
दीप प्रज्वलन व आचमन (Lamp & Holy Water)
गाय के शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें और तांबे के पात्र में स्वच्छ जल रखें।
संकल्प व पाठ (Sankalpa & Mindful Recitation)
हाथ में अक्षत व जल लेकर अपनी मनोकामना का स्मरण करें और स्पष्ट स्वर में लयबद्ध पाठ करें।
समर्पण व क्षमा याचना (Surrender & Gratitude)
पाठ के समापन पर भगवान को प्रणाम करें और अनजाने में हुई किसी त्रुटि के लिए क्षमा मांगें।
क्या आप अपनी कुंडली अनुसार संकल्प व समय जानना चाहते हैं?
आपकी लग्न राशि व वर्तमान महादशा के अनुसार यह पाठ कितने दिनों तक और किस माला से करना चाहिए, ज्योतिषी से सीधे 1-on-1 चैट पर पूछें।
इस पाठ एवं उपाय से संबंधित सामान्य जिज्ञासाएं
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